Poem on umbrella in hindi. Poems on Rain in Hindi 2019-01-11

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कविताएं

poem on umbrella in hindi

इंदुमती के मृत्यु शोक से अज रोया या तुम रोये थे? ।।५।। बल दो हमें ऐक्य सिखलाओ सँभलो देश होश में आवो । मातृभूमि-सौभाग्य बढ़ाओ मेटो सकल कलेश ।। जै जै. तेरा आह्वान सुन कोई ना आए, तो चल तू अकेला, जब सबके मुंह पे पाश. In a pasture, Binya finds her umbrella missing and becomes heartbroken. क्यों घर छोड़कर मैं यों कढ़ी? स्वप्न कल्पना सी सुकुमार सजीली? Rain is blue And so are you When you cry. When it's cold, I'll turn into snow.

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Umbrellas In The Rain Poem by Ernestine Northover

poem on umbrella in hindi

You say that you love the wind, but you close your windows when wind blows. If I were the rain I would also turn off the Sprinkler That falls from the sky. For that she is scolded by her mother. At the same time, Khatri is presiding over the competition and it rains during his speech. कमरों में अँधेरे लगाता है चक्कर कोई एक लगातार; आवाज पैरों की देती है सुनाई बार-बार. सबके मुंह पे पाश, हर कोई मुंह मोड़के बैठे, हर कोई डर जाय! And if I was furious I'd make a thunderstorm Over a town. His small Umbrella quaintly halvedDescribing in the AirAn Arc alike inscrutableElate Philosopher.

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11 Funny Friendship Poems

poem on umbrella in hindi

आज हम शहरातियों को पालतू मालंच पर सँवरी जुही के फूल-से सृष्टि के विस्तार का, ऐश्वर्य का, औदार्य का कहीं सच्चा, कहीं प्यारा एक प्रतीक बिछली घास है या शरद् की साँझ के सूने गगन की पीठिका पर दोलती कलगी अकेली बाजरे की। और सचमुच, इन्हें जब-जब देखता हूँ यह खुला वीरान संसृति का घना हो सिमट जाता है और मैं एकांत होता हूँ समर्पित। शब्द जादू हैं- मगर क्या यह समर्पण कुछ नहीं है? If I were the rain I would make sure That all the raindrops Fall on my cousin whose a brat! By: Linda If I Were The Rain If I were the rain I would let silver raindrops Fall down. एक बूंद के बदले तेरा घट पर खून बहाऊंगा? पितु के सम्मुख पुत्र रत्न की खाल खिंचाने वाला कौन? वह जानता नहीं, लेकिन अपने कंधों पर अपना शव आप ढोता है। - गजानन माधव मुक्तिबोध Gajanan Madhav Muktibodh यहाँ मुक्तिबोध के कुछ कवितांश प्रकाशित किए गए हैं। हमें विश्वास है पाठकों को रूचिकर व पठनीय लगेंगे। - आनन्द विश्वास Anand Vishvas नानी वाली कथा-कहानी, अब के जग में हुई पुरानी। बेटी-युग के नए दौर की, आओ लिख लें नई कहानी। बेटी-युग में बेटा-बेटी, सभी पढ़ेंगे, सभी बढ़ेंगे। फौलादी ले नेक इरादे, खुद अपना इतिहास गढ़ेंगे। देश पढ़ेगा, देश बढ़ेगा, दौड़ेगी अब, तरुण जवानी। नानी वाली कथा-कहानी, अब के जग में हुईं पुरानी। बेटा शिक्षित, आधी शिक्षा, दोनों शिक्षित पूरी शिक्षा। हमने सोचा,मनन करो तुम, सोचो समझो करो समीक्षा। सारा जग शिक्षामय करना,हमने सोचा मन में ठानी। नानी वाली कथा-कहानी, अब के जग में हुईं पुरानी। अब कोई ना अनपढ़ होगा, सबके हाथों पुस्तक होगी। ज्ञान-गंग की पावन धारा, सबके आँगन तक पहुँचेगी। पुस्तक और कलम की शक्ति,जग जाहिर जानी पहचानी। नानी वाली कथा-कहानी, अब के जग में हुईं पुरानी। बेटी-युग सम्मान-पर्व है, पुर्ण्य-पर्व है, ज्ञान-पर्व है। सब सबका सम्मान करे तो, जन-जन का उत्थान-पर्व है। सोने की चिड़िया तब बोले,बेटी-युग की हवा सुहानी। नानी वाली कथा-कहानी, अब के जग में हुई पुरानी। बेटी-युग के नए दौर की, आओ लिख लें नई कहानी। - आनन्द विश्वास - आनन्द विश्वास Anand Vishvas खेत-खेत में सरसों झूमे, सर-सर बहे बयार, मस्त पवन के संग-संग आया मधुऋतु का त्योहार। - जयशंकर प्रसाद Jaishankar Prasad बरसते हो तारों के फूल छिपे तुम नील पटी में कौन? By: Chris If I Were Rain I am blue I pour a lot My name is rain. जन्म-दिन के आस-पास या शायद उसी रात. When it's cloudy I have fun And yes, you know. विजयी मेरा शाश्वत प्यार ।। 'बहिन! Have you ever wondered about the poets who pour their hearts into the amazing poems you read? By: Jason If I Were The Rain If I were the rain I would make puddles everywhere. जिस ओर उठी अंगुली जग की उस ओर मुड़ी गति भी पग की जग के अंचल से बंधा हुआ खिंचता आया तो क्या आया? ।।४।। आँख अगर कोई दिखलावे उसका दर्प-दलन हो जावे । फल अपने कर्मों का पावे बने नामनि शेष ।। जै जै.

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Umbrellas In The Rain Poem by Ernestine Northover

poem on umbrella in hindi

This is why I am afraid, you say that you love me too. ताता गोदरेजवाली पारसी सेठों की बोली?. पंजाब केसरी के सर ऊपर लट्ठ चलाने वाला कौन? By: Jenna If I Were The Rain I would twinkle down, Down onto the ground. । किसने बाजी राव पेशवा गायब कहां कराया था, बिन अपराध किसानों पर कस के गोले बरसाया था, किला ढहाया चहलारी का राज पाल कटवाया था, धुंध पंत तातिया हरी सिंह नलवा गर्द कराया था, इन नर सिंहों के बदले पर नर सिंह रूप प्रगटाऊंगा, जब तक तुझको. By: Dan If I Were The Rain If I were the rain I would drop fast I would make a loud sound. If I were the rain I would make people happy Not sad.

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Rain Poems

poem on umbrella in hindi

He is usually made fun of village people of passing school children. इसी बहाने क्षण भर गा लें दुखमय जीवन को बहला लें ले मस्ती की आग- साजन! Deputed from what Firmament --Of what Astute Abode --Empowered with what MalignityAuspiciously withheld --To his adroit CreatorAcribe no less the praise --Beneficent, believe me,His Eccentricities -- by There was an old person of Shoreham, Whose habits were marked by decorum; He bought an Umbrella, and sate in the cellar, Which pleased all the people of Shoreham. बाँध लिया तुमने मुझको स्वप्नों के आलिंगन में! I would give the flowers Some water. सदियों रहे साथ, पर दोनों पानी तेल सरीखे ; हम दोनों को एक दूसरे के दुर्गुन ही दीखे! By: Erik Rain Today the rain Drops upon the window, Tap, tap, tap. इसी पुजारिन को समझो । दान दक्षिणा और निछावर इसी भिखारिन को समझो ॥ मैं उन्मत्त प्रेम की प्यासी हृदय दिखाने आयी हूँ । जो कुछ है, बस यही पास है इसे चढ़ाने आयी हूँ ॥ चरणों पर अर्पित है, इसको चाहो तो स्वीकार करो । यह तो वस्तु तुम्हारी ही है, ठुकरा दो या प्यार करो ॥ - सोहनलाल द्विवेदी Sohanlal Dwivedi हर घर, हर दर, बाहर, भीतर, नीचे ऊपर, हर जगह सुघर, कैसी उजियाली है पग-पग? Due to this humiliation, Khatri pledges to buy his own such umbrella. Having humor in your life is not just a matter of a good time, it's also a matter of living longer. Edgy rhythm and rhyme that kids will enjoy.

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Famous Short Umbrella Poems by Famous Poets

poem on umbrella in hindi

If I were the rain I would invite my friend over. धूल उड़ी या रंग उड़ा है, हाथ रही अब कोरी झोली। आँखों में सरसों फूली है, सजी टेसुओं की है टोली। पीली पड़ी अपत, भारत-भू, फिर भी नहीं तनिक तू डोली! युग-नेत्र उनके जो अभी थे पूर्ण जल की धार-से, अब रोष के मारे हुए, वे दहकते अंगार-से । निश्चय अरुणिमा-मित्त अनल की जल उठी वह ज्वाल सी, तब तो दृगों का जल गया शोकाश्रु जल तत्काल ही। साक्षी रहे संसार करता हूँ प्रतिज्ञा पार्थ मैं, पूरा करुंगा कार्य सब कथानुसार यथार्थ मैं। जो एक बालक को कपट से मार हँसते हैँ अभी, वे शत्रु सत्वर शोक-सागर-मग्न दीखेंगे सभी। अभिमन्यु-धन के निधन से कारण हुआ जो मूल है, इससे हमारे हत हृदय को, हो रहा जो शूल है, उस खल जयद्रथ को जगत में मृत्यु ही अब सार है, उन्मुक्त बस उसके लिये रौ'र'व नरक का द्वार है। उपयुक्त उस खल को न यद्यपि मृत्यु का भी दंड है, पर मृत्यु से बढ़कर न जग में दण्ड और प्रचंड है । अतएव कल उस नीच को रण-मध्य जो मारूँ न मैं, तो सत्य कहता हूँ कभी शस्त्रास्त्र फिर धारूँ न मैं। अथवा अधिक कहना वृथा है, पार्थ का प्रण है यही, साक्षी रहे सुन ये वचन रवि, शशि, अनल, अंबर, मही। सूर्यास्त से पहले न जो मैं कल जयद्रथ-वध करूँ, तो शपथ करता हूँ स्वयं मैं ही अनल में जल मरूँ। - मैथिलीशरण गुप्त Mathilishran Gupt - रामधारी सिंह दिनकर Ramdhari Singh Dinkar जला अस्थियाँ बारी-बारी चिटकाई जिनमें चिंगारी, जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर लिए बिना गर्दन का मोल कलम, आज उनकी जय बोल। - रामधारी सिंह दिनकर Ramdhari Singh Dinkar सलिल कण हूँ, या पारावार हूँ मैं स्वयं छाया, स्वयं आधार हूँ मैं - महादेवी वर्मा Mahadevi Verma कितनी करूणा कितने संदेश पथ में बिछ जाते बन पराग गाता प्राणों का तार तार अनुराग भरा उन्माद राग आँसू लेते वे पथ पखार जो तुम आ जाते एक बार - महादेवी वर्मा Mahadevi Verma वे मुस्काते फूल, नहीं जिनको आता है मुर्झाना, वे तारों के दीप, नहीं जिनको भाता है बुझ जाना। - महादेवी वर्मा Mahadevi Verma मैं नीर भरी दुःख की बदली, स्पंदन में चिर निस्पंद बसा, क्रंदन में आहत विश्व हँसा, नयनो में दीपक से जलते, पलकों में निर्झनी मचली! तुम सौरभ-सी सहज मधुर बरबस बस जाती मन में, पतझर में लाती वसंत, रस-स्रोत विरस जीवन में, तुम प्राणों में प्रणय, गीत बन जाती उर कंपन में! । किसने श्री रणजीत सिंह के बच्चों को कटवाया था, शाह जफर के बेटों के सर काट उन्हें दिखलाया था, अजनाले के कुएं में किसने भोले भाई तुपाया था, अच्छन खां और शम्भु शुक्ल के सर रेती रेतवाया था, इन करतूतों के बदले लंदन पर बम बरसाऊंगा, जब तक तुझको. Everyone would be too busy Yelling Rain, rain Go away Come back Another day. इसके बारे में बहुत से लोगों की जिज्ञासा है और वे समय-समय पर यह प्रश्न पूछते रहते हैं। - रोहित कुमार 'हैप्पी' डॉ० कलाम को समर्पित. स्वर्गीय भावों से भरे ऋषि होम करते थे जहाँ, उन ऋषिगणों से ही हमारा था हुआ उद्भव यहाँ ।। १८ ।। - रामावतार त्यागी Ramavtar Tyagi गूंजी थी मेरी गलियों में, भोले बचपन की किलकारी । छूटी थी मेरी गलियों में, चंचल यौवन की पिचकारी ॥ - रामधारी सिंह दिनकर Ramdhari Singh Dinkar खण्ड तीन - भारत-दर्शन संकलन Collections हम भारतीयों का सदा है, प्राण वन्देमातरम् । हम भूल सकते है नही शुभ तान वन्देमातरम् । । देश के ही अन्नजल से बन सका यह खून है । नाड़ियों में हो रहा संचार वन्देमातरम् । । स्वाधीनता के मंत्र का है सार वन्देमातरम् । हर रोम से हर बार हो उबार वन्देमातरम् ।। घूमती तलवार हो सरपर मेरे परवा नही । दुश्मनो देखो मेरी ललकार वन्देमातरम् ।। धार खूनी खच्चरों की बोथरी हो जायगी । जब करोड़ों की पड़े झंकार वन्देमात रम् ।। टांग दो सूली पै मुझको खाल मेरी खींच लो । दम निकलते तक सुनो हुंकार वन्देमात रम् । । देश से हम को निकालो भेज दो यमलोक को । जीत ले संसार को गुंजार वन्देमात रम् ।। - रीता कौशल आँखें बरबस भर आती हैं, जब मन भूत के गलियारों में विचरता है । सोच उलझ जाती है रिश्तों के ताने-बाने में, एक नासूर सा इस दिल में उतरता है । - सुशांत सुप्रिय बरसों बाद लौटा हूँ अपने बचपन के स्कूल में जहाँ बरसों पुराने किसी क्लास-रूम में से झाँक रहा है स्कूल-बैग उठाए एक जाना-पहचाना बच्चा - द्वारिकाप्रसाद माहेश्वरी उठो धरा के अमर सपूतो पुनः नया निर्माण करो। जन-जन के जीवन में फिर से नई स्फूर्ति, नव प्राण भरो। - रबीन्द्रनाथ टैगोर Rabindranath Tagore अनसुनी करके तेरी बात न दे जो कोई तेरा साथ तो तुही कसकर अपनी कमर अकेला बढ़ चल आगे रे-- अरे ओ पथिक अभागे रे । - भवानी प्रसाद मिश्र Bhawani Prasad Mishra कलम अपनी साध और मन की बात बिल्कुल ठीक कह एकाध। - भारत-दर्शन संकलन Collections फांसी का झूला झूल गया मर्दाना भगत सिंह । दुनियां को सबक दे गया मस्ताना भगत सिंह ।। फांसी का झूला.


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5 lines on umbrella for class 1st

poem on umbrella in hindi

युग-युग, प्रतिदिन, प्रतिक्षण, प्रतिपल प्रियतम का पथ आलोकित कर। - रोहित कुमार 'हैप्पी' हिन्दी दिवस पर एक नेता जी बतिया रहे थे, 'मेरी पब्लिक से ये रिक्वेस्ट है कि वे हिन्दी अपनाएं इसे नेशनवाइड पापुलर लेंगुएज बनाएं और हिन्दी को नेशनल लेंगुएज बनाने की अपनी डयूटी निभाएं।' - रोहित कुमार 'हैप्पी' कही गुब्बारे सिर पर फूटे पिचकारी से रंग है छूटे हवा में उड़ते रंग कहीं पर घोट रहे सब भंग! Even, Rajaram who was his accomplice abandons him. भारत वर्ष है ।।१५।। - रीता कौशल ऐ मन! Autoplay next video An assortment of coloured umbrellas, Fending off the rain, I wonder if those, concealed underneath, Have had lives disturbed by pain, With the greyness of the sky above, Their bodies crouching low, What is the message that greets the eye Where do all these 'bodies' go, There's a feeling that they may be hiding Not only from the rain, But that is just a 'thought' of mine, And I could be wrong - again! । किसने हर दयाल, सावरकर अमरीका में घेरवाया है, वैज्ञानिक जगदीश चन्द्र से प्रिय भारत छोड़वाया है, रास बिहारी, मानवेन्द्र और महेन्द्र सिंह को बंधवाया है, अंडमान टापू में बंदी देशभक्त सब भेजवाया है, अरे क्रूर ढोंगी के बच्चे तेरा वंश मिटाऊंगा, जब तक तुझको. जलाने जग को आई है! चल मनहर मइया ने सिर हिला दिया, देख रे! Now, you know My name is right for me. देख मनहर भइया मुस्करा रही है ना! उमड़ा स्नेह-सिन्धु अन्तर में, डूब गयी आसक्ति अपार । देह, गेह, अपमान, क्लेश, छि:! She accompanies the village policeman to Banikhet to find out the truth. Writing poetry is a great educational experience but it can also be a lifelong therapy for expressing and exploring personal feelings and experiences. Biniya lives with her mother and elder brother.

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Poem on umbrella in hindi (minimum 80

poem on umbrella in hindi

थूक थूक कर जमीं के ऊपर हमें चटाने वाला कौन? Is this pity or care? Later she accuses Khatri of stealing it. We are constantly adding new pages that cover a range of subjects for all ages, so be sure to check back often. इसपर अधिकार पाओ, वरना लगातार दुख दोगे निरंतर दुख सहोगे! Khatri's shop is searched but no umbrella is found. There would be a rainbow. नौ बरस की लम्बी सजा दे दी. If I were the sun I would dry out Everything that the rain did.

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Umbrellas In The Rain Poem by Ernestine Northover

poem on umbrella in hindi

By: Jaime Sun If I were the sun I could shine everyday. रंग उड़ाती मधु बरसाती कण-कण में यौवन बिखराती, ऋतु वसंत का राज- लेकर होली आई है! With all of the different sections dedicated to the many genres of poetry, a second language learner could plan a poem a day for study. किंतु शहीदों की आहों से शापित लोहा, कच्चा धागा। एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो। - हरिवंश राय बच्चन Harivansh Rai Bachchan निराला के देहांत के पश्चात् उनके मृत शरीर का चित्र देखने पर हरिवंशराय बच्चन की लिखी कविता - मरा मैंने गरुड़ देखा, गगन का अभिमान, धराशायी,धूलि धूसर, म्लान! What an enchanting poem - and such a unique approach to a familiar subject in your country especially he he - the mystery of those hidden beneath the forest of rain blockers. मरा मैंने सिंह देखा, दिग्दिगंत दहाड़ जिसकी गूँजती थी, एक झाड़ी में पड़ा चिर-मूक, दाढ़ी-दाढ़-चिपका थूक। मरा मैंने सर्प देखा, स्फूर्ति का प्रतिरूप लहरिल, पड़ा भू पर बना सीधी और निश्चल रेख। मरे मानव-सा कभी मैं दीन, हीन, मलीन, अस्तंगमितमहिमा, कहीं, कुछ भी नहीं पाया देख। क्या नहीं है मरण जीवन पर अवार प्रहार? ।।६।। हिन्दू मुसल्मान ईसाई यश गावें सब भाई-भाई । सब के सब तेरे शैदाई फूलो-फलो स्वदेश ।। जै जै. सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्, शस्यश्यामलाम्, मातरम्! By: Tyler If I Were a Raindrop Raindrops, raindrops Falling on my window. Then I'd come back To give the flowers water.


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'Umbrella' poems

poem on umbrella in hindi

इस तरह रह अगर जीवन का जिया कुछ अर्थ, मरण में मैं मत लगूँ असमर्थ! पास प्यासे के कुआँ आता नहीं है, यह कहावत है, अमरवाणी नहीं है, और जिस के पास देने को न कुछ भी एक भी ऐसा यहाँ प्राणी नहीं है, कर स्वयं हर गीत का श्रृंगार जाने देवता को कौनसा भा जाए! So have a laugh or have a cry or maybe feel a bit empowered by poetry written about a favorite animal. जोश में आकर, मनका गाना गूंज तू अकेला! जला दिए गए उसी नहीं मौजूद मकान में मैं लौटता हूँ बार-बार वह मैं जो दरअसल अब नहीं हूँ क्योंकि उस मकान में अपनों के साथ मैं भी जला दिया गया था - सुशांत सुप्रिय विडम्बना कितनी रोशनी है फिर भी कितना अँधेरा है कितनी नदियाँ हैं फिर भी कितनी प्यास है कितनी अदालतें हैं फिर भी कितना अन्याय है कितने ईश्वर हैं फिर भी कितना अधर्म है कितनी आज़ादी है फिर भी कितने खूँटों से बँधे हैं हम - अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' Ayodhya Singh Upadhyaya Hariaudh खेलो रंग अबीर उड़ावो लाल गुलाल लगावो । पर अति सुरंग लाल चादर को मत बदरंग बनाओ । न अपना रग गँवाओ । - अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' Ayodhya Singh Upadhyaya Hariaudh देख कर बाधा विविध बहु विघ्न घबराते नहीं रह भरोसे भाग्य के दुःख भोग पछताते नहीं काम कितना ही कठिन हो किन्तु उकताते नहीं भीड़ में चंचल बने जो वीर दिखलाते नहीं हो गये एक आन में उनके बुरे दिन भी भले सब जगह सब काल में वे ही मिले फूले फले । आज करना है जिसे करते उसे हैं आज ही सोचते कहते हैं जो कुछ कर दिखाते हैं वही मानते जो भी हैं सुनते हैं सदा सबकी कही जो मदद करते हैं अपनी इस जगत में आप ही भूल कर वे दूसरों का मुँह कभी तकते नहीं कौन ऐसा काम है वे कर जिसे सकते नहीं । जो कभी अपने समय को यों बिताते हैं नहीं काम करने की जगह बातें बनाते हैं नहीं आज कल करते हुए जो दिन गँवाते हैं नहीं यत्न करने से कभी जो जी चुराते हैं नहीं बात है वह कौन जो होती नहीं उनके लिए वे नमूना आप बन जाते हैं औरों के लिए । व्योम को छूते हुए दुर्गम पहाड़ों के शिखर वे घने जंगल जहाँ रहता है तम आठों पहर गर्जते जल-राशि की उठती हुई ऊँची लहर आग की भयदायिनी फैली दिशाओं में लपट ये कंपा सकती कभी जिसके कलेजे को नहीं भूलकर भी वह नहीं नाकाम रहता है कहीं । - सुशांत सुप्रिय मैं ढाई हाथ का आदमी हूँ मेरा ढाई मील का ' ईगो ' है मेरा ढाई इंच का दिल है दिल पर ढाई मन का बोझ है - अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' Ayodhya Singh Upadhyaya Hariaudh ज्यों निकल कर बादलों की गोद से थी अभी एक बूँद कुछ आगे बढ़ी। सोचने फिर-फिर यही जी में लगी, आह! यह साँझ-उषा का आँगन, आलिंगन विरह-मिलन का; चिर हास-अश्रुमय आनन रे इस मानव-जीवन का! । अमृतसर जलियान बाग का घाव भभकता सीने पर, देशभक्त बलिदानों का अनुराग धधकता सीने पर, गली नालियों का वह जिंदा रक्त उबलता सीने पर, आंखों देखा जुल्म नक्श है क्रोध उछलता सीने पर, दस हजार के बदले तेरे तीन करोड़ बहाऊंगा, जब तक तुझको. Into a river That would give me a ride. पर यही अहसास मुझे ज़िन्दा रखे है, यही तो मेरी शहज़ोरी है! धर्म-भीरु सात्विक निश्छ्ल मन वह करुणा का धाम सखी!! धर्म और लज्जा लुटती है! Have a blast, enjoy your time, and read this poem. तन की सौ शोभाएँ सन्मुख चलती फिरती लगतीं सौ-सौ रंगों में, भावों में तुम्हें कल्पना रँगती, मानसि, तुम सौ बार एक ही क्षण में मन में जगती! ए, काशी विश्वविद्यालय की यह रचना लाहौर से प्रकाशित 'खरी बात' में 1935 में प्रकाशित हुई थी। - भारत-दर्शन संकलन Collections पैदा हुआ उसी दिन, जिस दिन बापू ने था जन्म लिया भारत-पाक युद्ध में जिसने तोड़ दिया दुनिया का भ्रम। - कमला प्रसाद मिश्र Kamla Prasad Mishra मैं अपनी कविता जब पढ़ता उर में उठने लगती पीड़ा मेरे सुप्त हृदय को जैसे स्मृतियों ने है सहसा चीरा - कमला प्रसाद मिश्र Kamla Prasad Mishra उमड़ा करती है शक्ति, वहीं दिल में है भीषण दाह जहाँ है वहीं बसा सौन्दर्य सदा सुन्दरता की है चाह जहाँ उस दिव्य सुन्दरी के तन में उसके कुसुमित मृदु आनन में इस रूप राशि के स्वप्नों को देखा करता था शाहजहाँ - रामधारी सिंह दिनकर Ramdhari Singh Dinkar झंझा सोई, तूफान रूका, प्लावन जा रहा कगारों में; जीवित है सबका तेज किन्तु, अब भी तेरे हुंकारों में। - रघुवीर सहाय Raghuvir Sahay निर्धन जनता का शोषण है कह कर आप हँसे लोकतंत्र का अंतिम क्षण है कह कर आप हँसे सबके सब हैं भ्रष्टाचारी कह कर आप हँसे चारों ओर बड़ी लाचारी कह कर आप हँसे कितने आप सुरक्षित होंगे मैं सोचने लगा सहसा मुझे अकेला पा कर फिर से आप हँसे - गजानन माधव मुक्तिबोध Gajanan Madhav Muktibodh - रघुवीर सहाय Raghuvir Sahay राष्ट्रगीत में भला कौन वह भारत-भाग्य विधाता है फटा सुथन्ना पहने जिसका गुन हरचरना गाता है। मख़मल टमटम बल्लम तुरही पगड़ी छत्र चंवर के साथ तोप छुड़ाकर ढोल बजाकर जय-जय कौन कराता है। पूरब-पच्छिम से आते हैं नंगे-बूचे नरकंकाल सिंहासन पर बैठा, उनके तमगे कौन लगाता है। कौन-कौन है वह जन-गण-मन- अधिनायक वह महाबली डरा हुआ मन बेमन जिसका बाजा रोज बजाता है। - रघुवीर सहाय Raghuvir Sahay तोड़ो तोड़ो तोड़ो ये पत्थर ये चट्टानें ये झूठे बंधन टूटें तो धरती को हम जानें सुनते हैं मिट्टी में रस है जिससे उगती दूब है अपने मन के मैदानों पर व्यापी कैसी ऊब है आधे आधे गाने - भवानी प्रसाद मिश्र Bhawani Prasad Mishra जी हाँ हुज़ूर मैं गीत बेचता हूँ मैं तरह-तरह के गीत बेचता हूँ मैं क़िस्म-क़िस्म के गीत बेचता हूँ - महावीर प्रसाद द्विवेदी Mahavir Prasad Dwivedi महावीर प्रसाद द्विवेदी की कविताएं - भारत-दर्शन संकलन Collections कभी कभी खुद से बात करो, कभी खुद से बोलो । अपनी नज़र में तुम क्या हो? No matter what time of year, Nature Poems has poetry for every season and every type of weather. शोणित से तुम किसका कलंक धोते हो? ओ परम तपस्वी परम वीर ओ सुकृति शिरोमणि, ओ सुधीर कुर्बान हुए तुम, सुलभ हुआ सारी दुनिया को ज्ञान बापू महान, बापू महान!! हम तुझ पर बलिहारी हिन्दी!! ऋषभदेव शर्मा तरकश, 1996 - ऋषभदेव शर्मा हैं चुनाव नजदीक, सुनो भइ साधो नेता माँगें भीख, सुनो भइ साधो गंगाजल का पात्र, आज सिर धारें कल थूकेंगे पीक, सुनो भइ साधो - रोहित कुमार 'हैप्पी' कलयुग - राजेश्वर वशिष्ठ मित्रता का बोझ किसी पहाड़-सा टिका था कर्ण के कंधों पर पर उसने स्वीकार कर लिया था उसे किसी भारी कवच की तरह हाँ, कवच ही तो, जिसने उसे बचाया था हस्तिनापुर की जनता की नज़रों के वार से जिसने शांत कर दिया था द्रौणाचार्य और पितामह भीष्म को उस दिन वह अर्जुन से युद्ध तो नहीं कर पाया पर सारथी पुत्र राजा बन गया था अंग देश का दुर्योधन की मित्रता चाहे जितनी भारी हो पर सम्मान का जीवन तो यहीं से शुरु होता है! अब तो बार-बार भागा आऊँगा मनहर! From Hickory Dickory Dock to Little Miss Muffet, young children of today will be happily entertained by the timeless rhymes of yesterday. Soon after, Khatri gets a similar umbrella in red, which he claimed to have bought from.

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